सैलाब!!


Bihar-Flood1

देखो! आखिर आ ही गया सैलाब,
ना कोई इंद्र की कृपा और ना कोई वायु का दाब!
कितनो ने ले ली है जल समाधि,
जो बचे हैं, उनमे है बाकी जान आधी!!

अब ना कोई सहारा है और ना कोई मसीहा,
ना कोई उम्मीद की रौशनी और ना कोई दिया!
अब किससे कहोगे तुम अपनी आपबीती,
वो आएंगे और फिर चलेगी तुम्हारी लाशों पर भी राजनीति!!

जाकर लाओ उन् मसीहाओं को,
जिन्होंने भ्रमित किया है तुम्हारी दिशाओं को!
मांगो जवाब अपने हक़ का,
और मांगो जवाब अपनी बदकिस्मती का!!

तुम्हारे संग आंसू बहकर,
वो पिएंगे शराब!
अपने अरमानो के संग डूबते,
तुम झेलोगे सैलाब!!

अब तो आँखें खोलो मेरे भाई!
कब तक टूटते बाँध देखोगे,
कब तक देखोगे उजरते घर?
कब तक सुनोगे झूठे वादे,
और कब तक बचाओगे डूबते घर?

आँखों की काली पट्टी को खोलो,
और गले से जाती की जंजीर को तोड़ो!
और तब भी आँखें ना खुल पाये,
तो देखना फिर से आएगा सैलाब!!

लेखक : नीलेश रंजन